यूँ तो कभी बात न करना
लेकिन जब जी चाहे पास बुला कर
अपने से दरकिनार कर भी देना
यूँ तो तुम्हारी जरूरतों का हिसाब नहीं
लेकिन जो रजामंदी हुई है हमारी
उन्हें जब जी चाहे भुला भी देना
यूँ तो अपनेपन का एहसास भी अधूरा है
लेकिन जब कोई ज्यादा सगा मिल जाये
ग़ैरों से भी बद्तर सिला भी दे देना
यूँ तो छोड़ गए है कई अपना कहने वाले
जब नए बने अपनों की महफ़िल में हो
पहचानने से भी इंकार कर देना
यूँ तो पत्थर दिल हो चुका है मेरा
लेकिन संभाल के गुजरना मेरे सीने पे चड़ कर
टूटे दिल के कई बारीक़ टुकड़े अभी भी छुपे हुए हैं कहीं
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