Thursday, May 18, 2017

सवाल

बड़ी शिद्दत से चाहेंगे तुझे
ऐसा सोचा था कभी
तेरी खुद की चाहत को कैसे दरकिनार कर दें
बस ये सवाल है अभी

सवाल ये नहीं कि
क्या सोचूं मैं तुम्हारे बारे में
सवाल ये है कि
तुम क्या सोचती हो किसी और के बारे में

सवाल ये नहीं कि
क्या रिश्ता है मेरा तुम्हारा
सवाल ये है कि
क्या रिश्ता तुम्हे किसी और से है बनाना

सवाल ये नहीं कि
क्या कीमत है तुम्हारे साथ की मेरे लिए
सवाल ये है कि
किसका साथ बेशकीमती है तुम्हारे लिए

सवाल ये नहीं कि
क्या कुछ पूरी करेगा ख्वाइशें मेरी
सवाल ये है कि
किस बात में है छुपी खुशियां तेरी

सवालों का सिलसिला
तो चलता रहेगा यूं ही
जवाब देना चाहती हो या नहीं
बस यही सवाल है आख़री

Thursday, May 11, 2017

Walk all over me

यूँ तो कभी बात न करना
लेकिन जब जी चाहे पास बुला कर
अपने से दरकिनार कर भी देना

यूँ तो तुम्हारी जरूरतों का हिसाब नहीं
लेकिन जो रजामंदी हुई है हमारी
उन्हें जब जी चाहे भुला भी देना

यूँ तो अपनेपन का एहसास भी अधूरा है
लेकिन जब कोई ज्यादा सगा मिल जाये
ग़ैरों से भी बद्तर सिला भी दे देना

यूँ तो छोड़ गए है कई अपना कहने वाले
जब नए बने अपनों की महफ़िल में हो
पहचानने से भी इंकार कर देना

यूँ तो पत्थर दिल हो चुका है मेरा
लेकिन संभाल के गुजरना मेरे सीने पे चड़ कर
टूटे दिल के कई बारीक़ टुकड़े अभी भी छुपे हुए हैं कहीं