Monday, December 12, 2011

Murder


जिस मर्ज की दवा मिलती थी तुझसे कभी 
उस मर्ज की लाश लिए फिरते है हम अभी

तमन्ना मेरी तो खुद घुट घुट के मर गयी
अपनी तमन्ना को मरने ना देना कभी 

मिलेंगे हैवान मुझ जैसे हर कहीं 
खुद के इंसान को मारना ना कभी

बस वक़्त का खेल हम हार गए ये सदी
फ़रिश्ते तो हम भी होते थे कभी