जिस मर्ज की दवा मिलती थी तुझसे कभी
उस मर्ज की लाश लिए फिरते है हम अभी
तमन्ना मेरी तो खुद घुट घुट के मर गयी
अपनी तमन्ना को मरने ना देना कभी
मिलेंगे हैवान मुझ जैसे हर कहीं
खुद के इंसान को मारना ना कभी
बस वक़्त का खेल हम हार गए ये सदी
फ़रिश्ते तो हम भी होते थे कभी
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